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देशवासियो! संत रामपाल दास जी महाराज का उद्देश्य है कि अपने देश की जनता बुराइयों से बचे, शान्तिपूर्वक निर्मल जीवन जीए। परमेश्वर की भक्ति करे, अपने पूर्वजों की तरह बाँट कर खाए। दूसरे की माँ, बहन, बेटी अपनी ही माने। परमात्मा कहते हैं:- “पर नारी को देखिए, बहन बेटी के भाव। कहैं कबीर काम नाश का, यही सहज उपाय।। भावार्थ है कि दूसरी स्त्री को अपनी बहन, बेटी के भाव से देखें, जिससे परस्त्री को देखकर उठने वाली काम वासना स्वतः नष्ट हो जाती है। संत रामपाल जी परम संत तथा परमेश्वर कबीर जी के आध्यात्मिक तथा सामाजिक विचारों को जनता तक पहुँचा रहे हैं ताकि मानव जाति विकार रहित होकर परमात्मा की भक्ति करे। संत रामपाल दास जी के विचारों को सुनकर लाखों व्यक्तियों ने सब नशा त्याग दिया, सर्व बुराई त्यागकर सत्य भक्ति करते हुए निर्मल जीवन जी रहे हैं।

हम संत रामपाल जी के अनुयाई हैं, प्रत्येक गाँव में 2 से 20 परिवार आपको मिल जाऐंगे। आप उनको देखकर अंदाजा लगा सकते है कि वे अच्छे हैं या बुरे। संत रामपाल दास जी का अनुयाई बनने वाले के लिए नियम  कि वह:-

  1. शराब, माँस, तम्बाकू या अन्य नशीली वस्तुओं का सेवन नहीं करेगा।
  2. चोरी, दुराचार, रिश्वतखोरी, ठगी नहीं करेगा,
  3. भ्रूण हत्या मना है।
  4. दहेज देना तथा लेना मना है।
  5. विवाह में आडम्बर नहीं करना, नाचना-गाना मना है। आदि-आदि कुल 21 नियम हैं जिनका पालन करने वाला दीक्षा ले सकता है।

संत रामपाल दास जी का नारा हैः-

जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा।

हिन्दु, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, धर्म नहीं है न्यारा।।

हम भारत के संविधान तथा न्यायपालिका तथा विधायिका का सम्मान करते हैं। सब नेक नागरिकों का सत्कार करते हैं तथा बिगडे़ समाज को सुधारने का उद्देश्य रखते हैं। इसीलिए हमने “ राष्ट्रीय समाज सेवा समिति का गठन किया है। हमने संत रामपाल जी के विचारों को सुन और समझकर दीक्षा ली है और भारत की गरीब जनता को बुराईयों से रहित तथा अमीर बनाने के उनके लक्ष्य में सहयोग देने का संकल्प किया है। इसके लिए कुछ भी कुर्बानी देने का संकल्प किया है। इसके लिए कुछ भी कुर्बानी देनी पड़े, हम तैयार हैं।

महान परिवर्तन

विचार बदलेंगे तो क्रियाओं में परिवर्तन होगा

[wp-svg-icons icon=”point-right” wrap=”span”] देश की आजादी का लाभ केवल 5+10=15 प्रतिशत जनता को हुआ है। विशेषकर 5 प्रतिशत को ही अधिक लाभ है। देश की आबादी के 5 प्रतिशत व्यक्ति भ्रष्ट राजनेता, भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी तथा अन्य विभागों के भ्रष्ट अधिकारी व कर्मचारी तथा मिलावट करने वाले व फैक्ट्री के मालिक तथा भ्रष्ट जज हैं।

भारत देश की आजादी सन् 1947 से लेकर वर्तमान (2015) तक भारत के प्रधानमन्त्री ईमानदार रहे हैं। केवल प्रधानमन्त्री की ईमानदारी पर्याप्त नहीं है। उदाहरण के लिए आदरणीय श्री मनमोहन सिंह पूर्व प्रधानमन्त्री जी स्वयं तो ईमानदार थे, परंतु अन्य मन्त्रीगणों ने जो उत्पात किया, वह प्रत्यक्ष है। एक मन्त्री जी पर आरोप लगा कि 1,75,000 करोड (एक लाख पिछत्तर हजार करोड़) रूपये का घोटाला किया है। मन्त्री जी को जेल भी जाना पड़ा। फिर जमानत हो गई। केन्द्र तथा राज्य सरकारों में एैसे-एैसे कई हजार घोटाले हैं जो प्रकाश में नहीं आ सके हैं।

देश की गरीबी का कारण यही है क्योंकि गरीब जनता से कर (tax) लिया जाता है। उसका दुरूपयोग करके भ्रष्ट राजनेता, भ्रष्ट अधिकारी व कर्मचारी तथा भ्रष्ट जज अपनी जेबों में डालते हैं। हम यहाँ स्पष्ट करना अनिवार्य समझते हैं कि सब राजनेता, अधिकारी, कर्मचारी तथा जज भ्रष्ट नहीं हैं। परन्तु अधिकता भ्रष्टों की ही है। भ्रष्ट मन्त्री खरबों का गोलमाल करके भ्रष्ट जज को करोड़ों रिश्वत देकर बरी हो जाता है।

उदाहरण के लिए हाल में ही आए न्यायालयों के फैसलेः-

1. सलमान खान अभिनेता को निचली कोर्ट ने 5 वर्ष की सजा सुनाई। उसी दिन हाईकोर्ट ने जमानत दे दी।

2. जयललिता मुख्यमन्त्री (तमिलनाडु प्रांत) को निचली अदालत ने 4 वर्ष की सजा सुनाई तथा भारी जुर्माना किया, जेल भेज दी। महीने के बाद जमानत तथा तीन-चार महीने के बाद हाई कोर्ट ने बरी कर दी। हमारा कहना है कि या तो निचली कोर्ट का जज भ्रष्ट है या हाई कोर्ट का जज। एक मुकदमें में दो प्रकार के फैसले आने पर संदेह होना स्वाभाविक है। जजों की जिम्मेदारी जबाबदेही बनानी होगी।

समाधानः– संत रामपाल दास जी के सत्संग विचार सुनकर भारत की जनता सर्व बुराई रहित हो जाएगी। रिश्वत लेना तो दूर रहा अपनी नेक कमाई का 10 प्रतिशत दान किया करेगी।

भारत देश की 85 प्रतिशत जनता गरीब है। 5 प्रतिशत ऊपर बताए व्यक्ति तो देश का सर्वाधिक धन लिए बैठे हैं। 10 प्रतिशत कर्मचारी हैं जो सरकारी या गैर-सरकारी संस्थानों, फैक्टिंयों में नौकरी करते हैं। ये ऊपर से धनी लगते हैं, परंतु महीने की 15 तिथि के पश्चात् अपने को गरीब मानते हैं।

 महान परिवर्तन निकट है, उसके पश्चात् देश की गरीब जनता भी अमीर होगी।

[wp-svg-icons icon=”point-right” wrap=”span”] जैसे सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों का अपना तथा परिवार की बिमारी का सब खर्च सरकार देती है। परिवर्तन के पश्चात् प्रत्येक नागरिक जो 85 प्रतिशत बचेंगे, उनकी बिमारी का खर्च सरकार की ओर से दिया जाएगा।

[wp-svg-icons icon=”point-right” wrap=”span”] प्रत्येक नागरिक जो 85 प्रतिशत बचे हैं, प्रत्येक को 5 हजार रूपये प्रतिमाह अनुदान भी दिया जाएगा जो महँगाई के बढ़ने पर बढ़ाया जाता रहेगा।

[wp-svg-icons icon=”point-right” wrap=”span”] ‘‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ‘‘ का कारगर फार्मूला:- बेटी का जन्म होते ही उसी दिन से 5 हजार रूपये अनुदान उस बेटी के खाते में बैंक में जमा होना प्रारम्भ हो जाएगा। जो महँगाई के बढ़ने पर औसतन बढ़ाया जाया करेगा। जो प्रति नागरिक वाले 5 हजार अनुदान से भिन्न होगा अर्थात् 5 हजार प्रति नागरिक वाला तो मिलेगा ही, वह बचत खाता अलग रहेगा। जब बेटी विवाह योग्य (18 वर्ष) की होगी तो उसका बचत खातों में लगभग 21 लाख रूपये होंगे क्योंकि अनुदान वृद्धि होती रहेगी (18 वर्ष में अनुदान बढ़कर 15 हजार प्रतिमाह हो जाएगा तो 5+15/2 = 10 हजार रूपये औसतन प्रतिमाह होगा। एक वर्ष में एक लाख बीस हजार तथा 18 वर्ष में 21.60 लाख रूपये बनता है) न तो पिता को बेटी के विवाह की चिंता, न दहेज की। ससुराल वाले हाथ जोड़कर बेटी को ले जाऐंगे। अपनी पुत्रवधु को पलकों पर रखेंगे। परिवार वाला 5 हजार रूपये के अनुदान से बेटी की पढ़ाई का खर्च चलाएगा। इस प्रकार बेटी पढे़गी तथा बचेगी।

प्रश्न उठेगा कि ये तो हवाई किले बनाने वाली बात है, कैसे सम्भव हो सकता है?

उत्तर हैः– जैसे ऊपर एक मन्त्री के एक घोटाले की राशि है 1 लाख 75 हजार करोड़ रूपये, जिससे 29 करोड़ 16 लाख 66 हजार 666 व्यक्तियों (29,16,66,666 व्यक्तियों) को एक वर्ष तक 5 हजार रूपये प्रतिमाह अनुदान दिया जा सकता है। ऐसे-ऐसे कई हजार घोटाले बंद हो जाऐंगे। सेठ लोगों को ज्ञान होगा कि माया साथ नहीं जाती, धर्म साथ जाता है। अरब रूपये पास हैं। करोड़ों की कोठी व कार हैं, मृत्यु तो होगी ही, फिर कुत्ता बनकर उस कोठी में प्रवेश को तरसेगा। फिर वह सेठ अपने देश के गरीब बहन-भाईयों के लिए “राष्ट्रीय समाज सेवा समीत” को दान किया करेगा जो 85 प्रतिशत गरीब जनता के हितों में लगेगा। इस प्रकार भारत विश्व का धनी देश बनेगा।

प्रश्न उठेगा कि क्या आप सरकार बनाऐंगे?

उत्तर हैः– नहीं। सरकार कोई बनाए, जिसके भाग्य में है। हम उस मुख्यमन्त्री जी तथा प्रधानमन्त्री जी को संत रामपाल दास जी के सत्संग विचार सुनाकर स्वच्छ प्रशासन प्रदान करने का आग्रह करेंगे। सरकार चलाने में सहायता भी करेंगे। सरकार का कार्य केवल बिजली, पानी, सड़क निर्माण, कानून व्यवस्था बनाए रखने का होता है। वह तो घोटाला करने के पश्चात् भी चलता रहता है। हम तो घोटालों वाला पैसा गरीब जनता को अमीर बनाने के लिए सरकार से प्रयोग कराऐंगे। सरकार को जनहित के कार्य करने तथा मार्ग पर चलने के लिए बाध्य करेंगे क्योंकि हमारे साथ देश की 85 प्रतिशत जनता होगी।

विचार करें– 1. बिमारी का खर्च खत्म, 2. शराब, तम्बाखू आदि नशे का खर्च खत्म, 3. दहेज का खर्च खत्म, फिर अपने आप देश की जनता अमीर बन जाएगी।

प्रश्न उठेगा कि इससे तो जनता कामचोर हो जाएगी?

उत्तरः– नहीं। रोटी-कपड़े का खर्च तथा बिजली-पानी का खर्च भी है। उसके लिए तन-मन से कार्य करेंगे क्योंकि टेंशन फ्री हो जाएंगे तो काम करने कि रूचि अधिक बनेगी तथा धन जोड़ने की आदत भी तो विद्यमान है। चिन्ता मुक्त होकर प्रत्येक भारतवासी इज्जत से जीवन जीएगा तथा भक्ति भी करेगा।

विशेषः– ऊपर उपरोक्त अनुदान तथा अन्य सुविधा उन्हीं को मिलेगी जो भगवान की भक्ति करेगा, सब बुराईयों से दूर रहेगा।

मीडिया वाले भाई-बहनों से निवेदनः– यदि आप भारत को सोने की चिडि़या तथा जगत गुरू देखना चाहते हो तो आप हमारा सहयोग दो। भारतीय संस्कृति को बिगाड़ने में तथा कुरीतियों को बढ़ाने तथा युवा समाज को शर्मसार करने वाले वस्त्र तथा मनमानी विवाह प्रथा को बढ़ाने में मीडिया की अहम भूमिका रही है।

उदाहरण के लिए समलैंगिक विवाह का समाचार देना ही संस्कृति को आघात पहुँचाना है। गाँव या नगर में कोई व्यक्ति गलती कर देता है तो सभ्य व्यक्ति उसको आगे बच्चों तक नहीं जाने देते। उसका प्रचार नहीं करते। मीडिया वाले क्या कर रहे हैं? यदि कोई हमारी संस्कृति व रीति के विपरीत कोई घटना नाईजीरिया में घटी है। उसका प्रचार भारत में करेंगे। इस देश ने किया समलैंगिक विवाह समर्थन, वहाँ इतने समलैंगिक विवाह हुए। इसका दुष्प्रभाव किसी न किसी युवा बच्चे पर अवश्य पड़ जाता है। फिर एक से अधिक हो जाते हैं। इसी प्रकार फिल्मों में विवाह में इतना वैभव दिखाया जाता है, बड़े-बड़े बैंड-बाजे, डी.जे.। लड़की को आभूषणों से लदपद, श्रृंगार के लिए अलग से सैंटर बनाना। इसका कुप्रभाव जन-साधारण पर पड़ा। जिस कारण से बेटियों को पराया करना आसान नहीं रहा।

अब मीडिया ही हमारी संस्कृति को सुधारने में अहम भूमिका अदा कर सकता है और करने का समय भी आ गया है। मीडिया यदि देश का सच्चा हितैषी है तो एक वर्ष तक संत रामपाल दास जी के सत्संग चला दो अपने-अपने चैनलों पर और प्रिंट मीडिया इसको छाप दे। फिर देखो पूर्वोक्त अनुदान तथा बीमारी खर्च तथा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ वाला स्वपन कैसे  साकार नहीं होता है।  

मीडिया तथा बुद्धिजीवी समाज से निवेदन है कि आप जी संत रामपाल दास जी के विचार सत्संग हमारी वेबसाईट पर देखें तथा डाउनलोड करें। वेबसाईट = www.jagatgururampalji.org आप जी सत्संगों की DVD तथा पुस्तकें भी इसी वेबसाईट से डाउनलोड कर सकते हैं। पहले मीडिया देखे, फिर प्रचार में साथ दे।

[wp-svg-icons icon=”point-right” wrap=”span”] संत रामपाल दास जी को ठीक से न समझकर किन्हीं कारणों से उल्टा समझा तथा समझाया है।

उदाहरण:– समाचार पत्र में बस की एडवर्टाइजमैंट थी। एक अशिक्षित ने समाचार पत्र को उल्टा पकड़ लिया। एक अन्य अशिक्षित ने सोचा कि यह शिक्षित है और पूछा कि कोई खास खबर है क्या? उत्तर मिला कि नाश हो गया, एक बस उलट गई, पता नहीं कितने मरे होंगे। शिक्षित व्यक्ति ने यह वार्ता सुनी तो समाचार पत्र को सीधा करके दिखाया और बताया कि बस उल्टी नहीं है। यह बहुत उपयोगी और सस्ती है, यह लिखा है। मीडिया वाले तथा अधिकतर भारतवासी शिक्षित हैं। कृप्या संत रामपाल दास जी की वास्तविकता समझो और अन्य भोली तथा भ्रमित जनता को समझाओ तथा उनका कल्याण करने में सहयोग करें। 

प्रश्न उठेगा कि जो पूर्व में सुविधा देने का प्रावधान बताया है। यह तो किसी सरकार के बस की बात नहीं लगती, न संभव लगता है। यह तो कल्पना मात्र है। 

उत्तर है कि जैसे बरवाला से उठी भ्रष्टाचार, अत्याचार तथा अन्याय के विरूद्ध आवाज को मीडिया वालों ने 16.11.2014 तक तो ठीक-ठीक पेश किया था तथा दिखाया था कि 14.11.2014 से पुलिस ने सतलोक आश्रम की बिजली व पानी की लाईन काट दी। परंतु 18.11.2014 को मीडियाकर्मियों को पुलिस ने बेरहमी से पीटा तथा उनके कैमरे तोड़ दिए। उसके पश्चात् डर के कारण प्रशासन की ही एकतरफा झूठी खबरों का प्रचार किया। S.P. हिसार का कोई C.I.D. वाला आश्रम में गुप्त रूप में था। उसका मोबाईल आश्रम बरवाला में गिर गया जो भक्तों के हाथ लगा तो उससे S.P. के नाम मैसेज था कि आज 18.11.2014 को ही बाद में मीडिया वालों ने प्रशासन का साथ देने वाली बात मान ली। उसके बाद जो गलत खबरें छपी, जमीन फट जाए।

झूठी खबरें छापने के पीछे उद्देश्य:-पुलिस ने आश्रम के छः अनुयाईयों को मार डाला। कई दिन भूखे-प्यासे रखा तो जनता की हमदर्दी आश्रम के प्रति बढ़ने लगी थी। सरकार को भय हुआ कि यदि जनता इनके साथ हो गई तो तुम्हारे काले कारनामों की पोल खुल जाएगी। इसलिए संत रामपाल जी तथा आश्रम को बदनाम कराया। हमने अपनी इच्छा से आश्रम छोड़ा था। यदि हमारे आश्रम में वे वस्तुऐं होती तो उन वस्तुओं को समाप्त करने का हमारे पास पर्याप्त समय था। जो प्रशासन ने स्वयं आश्रम में रखकर मीडिया में दुष्प्रचार किया था। फिर भी सच्चाई मीडिया को बोलनी पड़ी थी कि सतलोक आश्रम बरवाला की व्यवस्था को देखकर दंग हैं। यहाँ पर एक लाख व्यक्तियों की खाने की सामग्री छः महीने तक की स्टोर है। चपातियाँ बनाने की 7 मशीनें, बड़े-बड़े कड़ाहे, भट्ठियाँ हैं।

ऐसी व्यवस्था सरकार भी पूरे भारत की नहीं कर सकती। खाना-पीना, स्नान, सत्संग समय में रूकना, 30 हजार रजाईयाँ सब व्यवस्था निःशुल्क है।

विचार करें:– जो कार्य सरकार भी नहीं कर सकती। उस कार्य को संत रामपाल दास जी महाराज की प्रेरणा से उनके अनुयाई कर रहे थे तो क्या पूरे भारत की जनता की नहीं कर सकते?

सतलोक आश्रम के सेवादार सत्संग सुनने व निकट-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं को अपना भाई-बहन मानते हैं। पहले आने वालों को खाना खिलाकर सुलाकर बाद में स्वयं खाते तथा विश्राम करते हैं। सर्व खर्च भक्तों के द्वारा दिए दान से किया जाता है। संत रामपाल जी शास्त्रविधि अनुसार साधना बताते हैं। जिससे भक्तों को भगवान बहुत लाभ देते हैं। गीता अध्याय 3 श्लोक 10 से 15 तक कहा है कि जो शास्त्रविधि अनुसार दान करता है, उसको परमात्मा बहुत लाभ देता है। जो दान नहीं करते, वे भक्ति के चोर हैं। इस बात से संत रामपाल जी के अनुयाई परिचित हैं।

अब एक बहन को हुए लाभ की सत्य कथा बताते हैं जो वर्तमान की है।:-

एक बहन गाँव लाला रोडाई जिला रेवाड़ी की है जो संत रामपाल दास जी की शिष्या है। उसका पति उसका विरोध करता था। स्वयं शराब पीता था। घर की वित्तीय स्थिति अच्छी नहीं थी। निर्वाह कठिनाई से चल रहा था। उस बहन को एक हजार रूपये की आवश्यकता पड़ी। अपने पति से कहा कि कुछ रूपये मेरे पास हैं, 400 रूपये आपके पास हों तो दे दो। उसके पति ने कहा कि उस अलमारी में दस-दस रूपये के 150 नोट रखे हैं यानि 1500 रूपये हैं, उसमें से निकाल ले। जब उस बहन ने नोट देखे तो वे हजार रूपये के 15 नोट थे। उसने अपने पति से कहा कि ये तो 15 हजार रूपये हैं, आप कहाँ से लाए? पति ने कहा कि मैनें 15 हजार रूपये इकट्ठे देखे कई वर्ष हो गए। ये तो तेरे गुरूजी का ही कमाल है। तेरे कबीर भगवान का कमाल है। वह उठकर आया, चार बार नोट गिने और उलट-सुलटकर देखे तथा शराब त्यागकर दीक्षा ली। उस बहन ने सतलोक आश्रम में सत्संग में साक्षात्कार देकर उपस्थित श्रद्धालुओं को बताया तथा 5 हजार रूपये उनमें से दान भी किए। वे नोट हजार-हजार रूपये के थे। ऐसे लग रहे थे जैसे आज ही छपकर तैयार हुए हों। ऐसी-ऐसी घटना सतलोक आश्रम से जुड़े लाखों भक्तों के साथ हुई हैं। किसी को किसी रूप में, किसी को किसी रूप में। फिर वे भक्त उत्साह से दान तथा सत्संग में सेवा करते हैं।

सज्जन पुरूषो! अविश्वास न करना, यह सत्य कथा है। पूर्व का भक्तों का इतिहास भी इस बात का साक्षी है कि 1. धना भक्त जी ने ज्वार का बीज साधु-भक्तों को खिला दिया था। खेत में कंकर बीज दी थी कि कोई घरवालों को शिकायत न करदे कि धना जी ने बीज नहीं बोया तो जाँच हो सकती है। खेत में तुम्बों की बेल उगी जो उस क्षेत्र में बिना बोये ही उग जाती थी। प्रत्येक तुम्बा ज्वार के बीज से भरा था। 5 कि.ग्रा. ज्वार एक तुम्बे से निकली, ढ़ेर लग गया था। 2. द्रोपदी जी ने अपनी साड़ी से नौ इंच का कपड़ा फाड़कर एक अंधे संत को दिया था। जिस कारण से उसका चीर परमात्मा ने बढ़ाया था। …….. ऐसे अनेकों उदाहरण हैं। 3. नरसी जी का भात 4. सुदामा का महल बनाना आदि सबको पता है।

अन्य प्रमाण :-

हरियाणा के चुनावों में चैधरी देवीलाल जी ने घोषणा की थी कि यदि मुझे मुख्यमंत्री बनाओगे तो मैं बूढ़ों को सौ रूपये प्रतिमाह पैंशन दूंगा व कर्जा माफ कर दूंगा। यह बात सन् 1987 के चुनावों की है। चैधरी बंसीलाल जी उस समय मुख्यमंत्री थे। उन्होंने कहा था कि यह केवल बहकाने के लिए प्रोपगेण्डा है।

यदि यह संभव होता तो मैं इस कार्य को श्री देवीलाल के लिए नहीं छोड़ता, मैं ही कर देता। चैधरी देवीलाल से फिर पत्रकारों ने पूछा कि आप यह कार्य कैसे कर सकोगे? उन्होनें कहा कि जब जनता मुझे मुख्यमंत्री बना देगी तो लिखूंगा कि सौ रूपये प्रतिमाह पैंशन दी जाए और कर्जा माफ किया जाऐ नीचे लिख दूँगा ‘‘देवीलाल‘‘। ऐसे करूँगा।

विचार करें:– उस समय लगता था कि सरकार कैसे इतना खर्च कर पाएगी और वर्तमान में सरकार बनाने का दावा करने वाले दो हजार रूपये वृद्ध पैंशन करने की घोषणा कर रहे हैं और वर्तमान में 1200 रूपये दिए जा रहे हैं। सन् 1987 के सौ रूपये, आज के तीन हजार रूपये के समान हैं। हमारे सतगुरू देव रामपाल दास जी यह समाज सेवा राजनीति से बाहर रहकर धर्मनीति से करने का उद्देश्य रखते हैं। सफलता अवश्य मिलेगी।

प्रश्न उठेगा कि क्या बेटी वाला अनुदान उन दस प्रतिशत को भी मिलेगा जो दिखते अमीर हैं, महीने की 15 तारीख के पश्चात् गरीब महसूस करते हैं।

उत्तर होगा – हाँ। केवल वही मिलेगा जो जन्म से 18 वर्ष तक खाते में जमा होगा। क्या उनके माता-पिता तथा भाई बहनों को भी अनुदान का लाभ मिलेगा। हाँ, जो बेरोजगार होंगे, वे उन 85% में होंगे।

प्रश्न होगा कि जिसकी बेटी उस समय जब यह योजना शुरू होगी, दो या अधिक वर्ष की होगी, उसको भी उस योजना का लाभ मिलेगा?

उत्तर होगा कि उसी महीने उन बेटियों के खाते खुल जाऐंगे। समय आने पर सब सुचारू नियम बनाए जाऐंगे।

[wp-svg-icons icon=”point-right” wrap=”span”] राष्ट्रीय समाज सेवा समीति का कार्यालय प्रत्येक गाँव, तहसील, नगर में होगा। किसी प्रकार का आपसी झगड़ा या आपसी मतभेद का सुलह उसी कार्यालय में कराया जाएगा। कोई भी भक्त कचहरियों के कोल्हू में नहीं पिसने दिया जाएगा।

प्रश्न उठेगा कि यह वर्तमान कलयुग में असंभव बात है।

उत्तर है कि जिस समय मानव समाज संत रामपाल जी के सत्संग सुनेगा तो आत्मा निर्मल हो जाएगी। सब मानव अपने से लगेंगे। उनको ज्ञान होगा कि कौरव-पांडव आपसी भाई बँटवारे (विभाजन) अर्थात् संपत्ति (राज्य) के हिस्से को प्राप्त करने के लिए लड़कर मर गए। वह पृथ्वी यहीं रह गई। इसी पृथ्वी पर अरबों-खरबों व्यक्ति अपना कब्जा मानते थे। सब चले गए, पृथ्वी यहीं पर रह गई। भक्ति करने वाले को परमात्मा भाग्य से अधिक लाभ देता है। इस प्रकार के विचार प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावित करेंगे। संत रामपाल दास जी ने अनेकों भक्तों के विवाद इन्हीं विचारों से निपटाए हैं। अब वे भक्त कहते हैं कि हमें ज्ञान नहीं होता और परमात्मा की शरण में नहीं होते तो हम लड़-लड़कर विनाश कर लेते। आज सुख से बस रहे हैं। भक्ति कर रहे हैं। ठीक से निर्वाह चल रहा है।

[wp-svg-icons icon=”point-right” wrap=”span”] एक व्यक्ति ने दूसरे भोले व्यक्ति की 30 एकड़ जमीन धोखा करके हड़प ली। वह व्यक्ति गाँव छोड़कर शहर में मजदूरी करने चला गया। वहीं बस गया। फिर फलों की रेहड़ी लगाई। कुछ दिन बाद कपड़े की दुकान कर ली, मालामाल हो गया। जिसने जमीन हड़पी थी, वह पागल होकर मरा। उसका एक पुत्र था, वह अधरंग का शिकार होकर भुगत कर मरा। पोत्रों ने ट्रांसपोर्ट बना ली, टंकों में नुक्सान हो गया, सारी जमीन बेचकर कर्जा दिया। रोड़ पर आ गए। निर्वाह भी कठिनाई से चल रहा है। जब हम परमात्मा के विधान से परीचित हो जाएंगे तो डरकर कार्य करेंगे। पापों से बचेंगे।

इन उपरोक्त समाज सुधारक कार्यों से डरकर उपरोक्त 5 प्रतिशत व्यक्तियों ने एक सुनियोजित षड़यन्त्र के तहत बरवाला काण्ड करवाया है ताकि आने वाले समय में राष्टंीय समाज सेवा समीति का उन पर अंकुश न लग जाए व उनकी अगली पीढि़याँ भी इन्हीं की तरह आम व्यक्तियों (85%) का खून चूसने से रह जाऐं।

राष्ट्रीय समाज सेवा समीति